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 तीजा महाउत्सव, हरितालिका व्रत

तीज की कथा (ak91 हिंदी )

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शिव जी की आरती

कृष्ण जी भजन कीर्तन

शिव जी भजन कीर्तन

भक्ति भजन कीर्तन

ॐ जय शिव ओंकारा आरती


माँ पार्वती अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप करती थी । तप को करते समय उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। कई महीनों तक सूखे पत्ते चबाकर खाएं और फिर कई वर्षों तक उन्होंने केवल हवा का सेवन करके ही जीवन व्यतीत किया। माता पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने पार्वती  का विवाह करने का विचार बना लिया ।

शिव जी आरती

इसी दौरान एक दिन महर्षि नारद जी का आगमन हुआ उन्होंने बताया कि वह भगवान विष्णु की ओर से पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव लेकर आए हैं । यह प्रस्ताव माँ पार्वती के पिता ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पिता ने जब माँ पार्वती को उनके विवाह की बात बतलाई तो वे बहुत दु:खी हो गईं और जोर-जोर से विलाप करने लगीं। 


और विलाप करते हुए वह अपनी सखी के पास पहुंची तब उनकी सखी ने पूछा, सखी तुम क्यों व्याकुल हो, क्यों विलाप कर रही हो इतना,क्या कोई अनहोनी हो गई । सखी के पूछने पर माता ने उसे बताया कि वह कठोर व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कर रही हैं, लेकिन उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते हैं। तब सहेली ने कहा है अगर तुम विवाह नहीं करना चहतीं तो तुम उस घने वन में चली जाओ जहां कोई नहीं जाता वहां तुम अपनी तपस्या अच्छे से कर सकती हो ।

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 माता पार्वती अपनी सखी की बात सुनकर उस घने वन में चली गईं और वहां एक गुफा में जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गईं । माँ पार्वती की इस तपस्वनी रूप को नवरात्रि के दौरान माता शैलपुत्री के नाम से पूजा जाता है।

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भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र को माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और शिव जी की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया । तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इसलिए इस भाद्रपद की तृतीया को तीज या तीजा के रूप में मनाते है ।


 कि इस दिन जो कन्याएं विधि-विधानपूर्वक और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती हैं, उन्हें अपने मन के अनुरूप वर मिलता है । और जो महिलाएं इस व्रत को पूरी निष्ठा और भक्ति से करती हैं उनके दांपत्य जीवन में हमेशा खुशी बनी रहती है ।

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