दर्दनाक कहानी हथनी मां की,सुनिए हमारी जुबानी
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यह घटना केरल राज्य की है यह घटना हमारा दिल ही नहीं दहला रही बल्कि हमें बार-बार सोचने पर मजबूर कर रही है कि कितना बेबाक हो चुका है इंसान और इंसान की इंसानियत भी फेक हो चुकी है। क्या बिगाड़ा था उस बेचारी हथिनी ने किसी का जो उसके साथ इतना घिनौना कृत्य किया गया कहा जाता है कि हथनी के गर्भ में एक शिशु मौजूद था हथनी रोज की तरह अपने पेट को पालने के लिए अपना खान-पान ढूंढ रही थी कि अचानक उसे एक फल स्वरुप पाइनएप्पल दिखा उसने उस पाइनएप्पल को खा लिया उस पाइनएप्पल को खाने के बाद उसे इतनी पीड़ा हुई कि वह सीधे जाकर नदी के अंदर पानी,पीने के लिए गयी लेकिन पानी पीते ही उसकी मौत हो गई क्योंकि अंदर जाकर बम फूट चुका था और बम फूटने से उसका शिशु मर चुका था और शिशु के मरने के बाद जो भयानक पीड़ा उसे हुई वह सहन नहीं कर पाई, महसूस भी नहीं कर पा रहे होंगे हम लेकिन इतनी तकलीफ और दर्द में भला वह क्या करती उसने स्वयं को बहुत संभालने की कोशिश की थी लेकिन इतना रक्त बह चुका था उसके मुंह से रक्त की धार लगी हुई थी इतनी तकलीफ में वह चिंघाड़ भी नहीं पा रही थी अपने किसी साथी को बुला भी नहीं पा रही थी इतनी बेबाक गुस्ताखी करने के बाद वह इंसान इंसानियत के नाम पर धब्बा बन गया और पता नहीं ऐसे कितने मासूम जानवरों को इस चीज से खतरा हो सकता है इंसानों को मैं यही कहना चाहूंगी कि जागो क्योंकि अपनी इंसानियत पर आई है क्योंकि इंसान तभी इंसान कहलाता है जब वह दूसरों की मदद करता है जब दूसरों को सहारा देता है जब वह दूसरों की सेवा करता है ना कि दूसरों की हत्या बेचारी मासूम ,
उसने क्या बिगाड़ा था किसी का जो उसे यह सजा मिली उसके बाद एक गाय पर भी यह टेस्ट हुआ और गाय का भी पूरा मुंह फूट गया इस तरह के अपराधों पर रोक लगाई जाए इसके प्रति कोई ना कोई कदम उठाने चाहिए और उसको जिसने यह किया उसे कड़ी सजा देनी चाहिए क्योंकि जीवन हर जीव में बसताहै और जीवन को समाप्त करने का हक सिर्फ ईश्वर को है इंसानो को नहीं तो इंसानों को उनकी भूल और गलती की सजा मिलनी चाहिए क्योंकि अगर उनको सजा नहीं मिली तो उनकी मनमानी हद से ज्यादा बढ़ जाएंगी और हद से ज्यादा बढ़ने के बाद वो आतंक फैलाएंगे क्योंकि यहां सब कुछ आतंक से कम नहीं था। जानवरों के संरक्षण हेतु नियम बनाया गया है ना कि जानवरों के भक्षण हेतु।
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Case of atrocities with female elephants in Kerala,achhi khabre 91
जानवरों के संरक्षण में बहुत पहले ही कानून में ऐसे नियम बनाए गए जिससे कि जानवरों की हत्याएं रोकी जा सके लेकिन आज के समय में इन सब नियमो का पालन करते हुए भी कुछ इंसान धोखे से जानवरों की जान ले रहे हैं और धोखे से उनके साथ गलत करते जा रहे हैं अब इन इंसानो को पकड़े, तो इन्हें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए क्योंकि इनके दिमाग में और दिल में ममता और दया का कोई स्थान ही नहीं है बेचारी मासूम हथिनी और बेचारा उसका छोटा सा कोख में पलने वाला बच्चा उसने किसी का क्या बिगड़ा था। वे उनका जीवन जी रहे थे लेकिन इंसानों को किस बात की जलन किस बात की उनसे ईर्षा की उन्होंने उन दोनों के जीवन को नष्ट कर दिया हथनी अगले दीन मरी हुई मिली और रेस्क्यू टीम आ पहुंची तो इतनी बुरी तरह से घायल थी की कुछ समझना मुश्किल था। इस तरह से इंसान जानवरों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है फिर हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि भगवान हमारी मदद करेगा भगवान भी उसी की मदद करता है जो खुद दूसरों की मदद करता है एक तरफ से हमारे जीवन में संकट आया हुआ है उस बीच ऐसा घिनौना कृत्य किया जा रहा है जिसकी वजह से शर्मिंदगी महसूस होने लगी है इंसानियत के नाम पर जो लोग आडंबर रचते हैं उनकी इंसानियत मात्र दो कौड़ी की रह गई है क्योंकि इतना बड़ा अपराध करने के बाद ही वह अपराधी सामने नहीं आ सका हम इसे एक तरह से क्राइम ही तो कह सकते हैं क्योंकि क्राइम करने वाला ही तो गुनहगार होता है
"इंसानों पर बस नहीं चला तो
जानवरों को अपना शिकार बनाने चले ।।
जब इंसानों पर अपना बस नहीं चला तो । जानवरों को शिकार बनाने चले हैं।।
जानवरों की जिंदगी उजाड़ कर ।
अपना आशियां बसाने चले हैं।।"
मेरे दिल दिमाग में बस इतनी बातें समझ में आती है कि मासूम और मूक जानवरों को कभी भी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह जानवर हमारे प्रकृति की रक्षा के लिए बनाए गए हैं अगर यह जानवर हमारे प्रकृति के आवरण में ना रहे तो हमारा जनजीवन अस्त व्यस्त होगा क्योंकि यह जानवर ही तो है जो प्रकृति के बहुत करीब होते हैं और प्रकृति को अपने अंदरूनी शक्ति से पहचानते हैं समझते हैं हम इंसानों ने तो बस शहरों में रहना सीखा है और शहर की गंदगी को बढ़ाना सीखा है लेकिन यह जानवर वनस्पति और प्राकृतिक वातावरण में रहकर अपने आप को शुद्ध रखते हैं और अपने आप के साथ-साथ हमारे वातावरण को भी साफ रखते हैं जानवरों को हम सिर्फ इसलिए बचाते हैं क्योंकि अगर वह नहीं रहेंगे तो हमारी प्रकृति भी डाबाडोल हो जाएगी संसार में बहुत से प्राणी है जिनको सिर्फ और सिर्फ प्राकृतिक रक्षा के लिए जाना जाता है हर जगह पर आप देख लीजिए जीव जंतु हमारे लिए अच्छा ही करते हैं कभी गलत नहीं करते लेकिन हम इंसान जीव जंतु को मार कर कौन सी भलाई का कार्य करने जा रहे हैं मुझसे बर्दाश्त नहीं होता इन मासूम जानवरों का हाल हमें मिलकर कोई उपाय करना चाहिए। हमारी गवर्नमेंट को कोई उपाय करना चाहिए और जिस भी इंसान का ऐसी करतूतो में हाथ है उसे पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए ताकि वह जिंदगी में दोबारा ऐसी गलती ना कर पाए और कि कोसी मासूम जानवरों का गला न घोट पाए, इतनी शर्मनाक घटना है देश व विश्व में प्रकृति आपातकाल है तो कम से कम हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए और ऐसे संकट की घड़ी में ऐसे कृत्य नहीं करना चाहिए। और कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए, बाकी आगे आप समझदार हैं इंसान हैं और इंसानी दिमाग का सही कार्यों के लिए इस्तेमाल करिए।
धन्यवाद!
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बच्चों का मन पढ़ाई कि और अग्रसर कैसे करें। जानिए बच्चों की खबर
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